SBI Car Loan Scheme
इंडिया न्यूज, अंबाला
क्या आप जानते हैं कि सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिए भी लोन लिया जा सकता है। हालांकि, ऐसा लोन लेने से पहले आपको कुछ चीजों का ध्यान रखने की जरूरत है। जैसे कि आपको पता लगाना चाहिए कि क्या बैंक/वित्तीय संस्थान सेकेंड हैंड कार के लिए लोन देने के लिए तैयार है या नहीं।
पुरानी कार अच्छी कंडीशन में खरीदें, वर्ना बाद में उस पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। कई बार कुछ पुरानी कार के दाम भी इतने अधिक होते हैं कि एक साथ पैसा देना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आज हम आपको ऐसे बैंक के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जो पुरानी कार खरीदने पर लोन मुहैया करा रही है।
जी हां हम बात कर रहे हैं एसबीआई की। एसबीआई की सर्टिफाइड प्री ओन्ड कार लोन स्कीम में 9.25 ब्याज दर के साथ गाड़ी की कीमत का 85 फीसदी तक लोन दे रही है। इस स्कीम में बैंक से मिनिमम तीन लाख रुपये और मैक्सिमम एक करोड़ रुपये तक का लोन लिया जा सकता है। वहीं, लोन का रिपेमेंट कस्टमर को मैक्सिमम पांच साल में करना होगा। अधिक जानकारी के लिए आप 1800-11-2211 नंबर पर कॉल कर डिटेल जान सकते हैं।
प्रोसेसिंग फीस (SBI Car Loan Scheme)
एसबीआई की वेबसाइट के मुताबिक सर्टिफाइड कार लोन स्कीम के तहत लोन की ब्याज दरें 9.25 फीसदी से 12.75 फीसदी के बीच हैं। वहीं, प्रोसेसिंग फीस लोन अमाउंट का 1.25 फीसदी प्लस जीएसटी होगी। यह मैक्सिमम 10,000 प्लस जीएसटी और मिनिमम 3,750 रुपये प्लस जीएसटी हो सकती है। बैंक के मुताबिक एसबीआई की सर्टिफाइड प्री ओन्ड कार लोन स्कीम में मिनिमम तीन लाख रुपये और मैक्सिमम एक करोड़ रुपये तक का लोन लिया जा सकता है.
सालाना इनकम तीन लाख से ज्यादा
वेबसाइट मुताबिक सैलरीड, सेल्फ इम्प्लॉयड, प्रोफेनल्स के अलावा एग्रीकल्चर और उससे जुड़ी एक्टिविटी में शामिल लोग भी प्री ओन्ड कारों के लिए लोन ले सकते हैं। इसमें शर्त यह है कि सैलरीड, सेल्फ इम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स की सालाना इनकम तीन लाख या इससे ज्यादा होनी चाहिए। वहीं, एग्रीकल्चर और इससे जुड़ी एक्टिविटीज में शामिल लोगों के लिए इनकम की लिमिट चार लाख ये इससे ज्यादा है। इस लोन के लिए 21 से 67 साल की उम्र तक के लोग अप्लाई कर सकते हैं।
कस्टमर्स को देने होंगे ये डॉक्यूमेंट (SBI Car Loan Scheme)
एसबीआई सर्टिफाइड प्री ओन्ड कार लोन स्कीम के लिए अप्लाई करते समय में आपको इनवॉयस प्रोफॉर्मा, सेलर के आरसी की कॉपी, सेलर के मोटर इंश्योरेंस की कॉपी देनी पड़ेगी। वहीं, लोन डिस्बर्समेंट के समय तय नियम के मुताबिक डीलर और सेलर के बीच सेल एग्रीमेंट, डीलर से अंडरटेकिंग, बैंक क्यिलरेंस और इंश्योर्ड के नाम और फाइनेंसर में बदलाव के बारे में इंश्योरेंस कंपनी के साथ ही बातचीत की डीटेल देनी होती है।
बैंक से इस बारे में डीटेल जानकारी मिल जाएगी। इनकम इनवॉयस प्राइस मारुति ट्रू वैल्यू, हुंडई एच-प्रॉमिस, होंडा आॅटो टेरेस, टाटा एश्योर्ड, महिंद्रा फर्स्ट ज्वाइस जैसी कंपनियों से होने चाहिए। वहीं, डिफॉल्ट पीरियड में बकाया अमाउंट पर मौजूदा ब्याज दर के अलावा 2 फीसदी मंथली पेनल्टी देनी पड़ेगी।
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